उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में सतत आजीविका हेतु नवाचारी जलीय कृषि पर किसानों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में सतत आजीविका हेतु नवाचारी जलीय कृषि पर किसानों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
/ March 13, 2026
Submitted by
pawankumar
on March 13, 2026
हल्द्वानी।
उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा वित्त पोषित “सतत आजीविका के लिए नवाचारी जलीय कृषि: मछली तालाब डिज़ाइन एवं किसानों व शिक्षार्थियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम द्वारा स्वरोजगार स्थिरता को बढ़ावा” शीर्षक के अंतर्गत आज उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 12 मार्च 2026 को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें भीमताल, नौकुचियाताल, सलडी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए मछली पालक किसानों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को वैज्ञानिक मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, तालाब डिज़ाइन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, मछली आहार, रोग नियंत्रण एवं सतत उत्पादन पद्धतियों के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्वरोजगार को स्थायी रूप से सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, माननीय कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा की गई। उन्होंने अपने संबोधन में किसानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, नवाचारों को व्यवहार में लाने तथा मछली पालन को लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करने हेतु प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर प्रो .जीतेन्द्र पाण्डेय निदेशक कंप्यूटर विज्ञान, विज्ञान विद्याशाखा के निदेशक प्रो. पी. के. सहगल,प्रो.कमल देवलाल, प्रो.वीरेंद्र कुमार ,डा.पूजा जुयाल,डा.प्रभा,डा.मुक्ता जोशी आदि उपस्थित रहे । कार्यक्रम में माननीय कुलपति जी ने किसानों और शिक्षार्थियों के बीच समन्वय स्थापित करने पर बल दिया, जिससे शिक्षार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके और किसान आधुनिक तकनीकों का सीधा लाभ उठा सकें।
इस अवसर पर प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, माननीय कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी तथा परियोजना के प्रधान अन्वेषक (PI) डॉ. श्याम सिंह कुंजवाल एवं सह-प्रधान अन्वेषक (Co-PI) डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा सभी उपस्थित किसानों को मछली आहार (फीड) का वितरण किया गया। साथ ही किसानों को परियोजना के उद्देश्यों एवं भविष्य की कार्ययोजना से अवगत कराया गया।
अंत में, परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. श्याम सिंह कुंजवाल द्वारा उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST), देहरादून का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ और इससे क्षेत्र में सतत जलीय कृषि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई।