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उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में ‘प्रातिज्ञ’ का भव्य आयोजन, लोक-संगीत, शास्त्रीय गायन व कथक से सजा सांस्कृतिक मंच

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में ‘प्रातिज्ञ’ का भव्य आयोजन, लोक-संगीत, शास्त्रीय गायन व कथक से सजा सांस्कृतिक मंच

Program
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में ‘प्रातिज्ञ’ का भव्य आयोजन, लोक-संगीत, शास्त्रीय गायन व कथक से सजा सांस्कृतिक मंच हल्द्वानी, 25 अप्रैल। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी एवं संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सीडीएस स्व. जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में ‘प्रातिज्ञ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदर्शन कला के क्षेत्र के विख्यात कलाकारों ने अपने अनुभव साझा करने के साथ मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वागत स्वरूप संगीत, नृत्य एवं कला प्रदर्शन विभाग के शिक्षार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। लोक कलाकार डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने उत्तराखण्ड के लोक संगीत की प्रस्तुति देते हुए लोक धुनों में निहित शास्त्रीय राग-रागिनियों का विस्तृत परिचय कराया। उन्होंने अपनी संगीतमय प्रस्तुतियों के माध्यम से बताया कि उत्तराखण्ड के लोक संगीत में शास्त्रीय संगीत के विविध राग-रागिनियां किस प्रकार समाहित हैं, जिसे श्रोताओं ने अत्यंत सराहा। इसके बाद प्रो. हरविन्दर सिंह ने अपने जीवन अनुभवों के साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी तथा संगीत साधना में निरंतर सीखने और नियमित रियाज के महत्व पर विशेष जोर दिया। कथक नृत्यांगना डॉ. पूर्णिमा पाण्डे ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति से दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में कलाकार बनने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इसके लिए जल्दबाजी छोड़कर निरंतर अभ्यास करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि आपके भीतर अपने गुरु तथा अपनी कला के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ. बसन्ती बिष्ट ने भारतीय लोक एवं शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण पर बल दिया। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहलों की जानकारी देते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और समाज को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में ‘प्रातिज्ञ’ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के लिए संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली को विशेष धन्यवाद दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान ने ऐसे आयोजनों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन और संस्कार हमें समाज में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट, निदेशक अकादमिक प्रो. पी.डी. पंत, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रयाग जोशी, डॉ. भैरव दत्त तिवारी, प्रसिद्ध संगीतज्ञ पं. चंद्रशेखर तिवारी, सरोद वादक स्मित तिवारी, विश्वविद्यालय की विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशकगण, विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य एवं अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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