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एआई की सहायता से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है: कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी

एआई की सहायता से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है: कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी

AI
हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (CIQA) द्वारा “Curriculum Design in the Age of AI for Open & Distance Learning” विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को कृत्रिम मेधा (AI) की सहायता से अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति ने कहा कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के लिए एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभर रही है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पाठ्यक्रम को इस प्रकार डिजाइन किया जाना चाहिए जिससे शिक्षार्थियों को व्यक्तिगत (Personalized) और लचीला (Flexible) शिक्षण अनुभव प्राप्त हो सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समुचित उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार है और गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री के निर्माण एवं अनुवाद में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के जैव प्रौद्योगिकी संकाय के अधिष्ठाता एवं स्पेशल सेंटर फॉर ई-लर्निंग के अध्यक्ष प्रो. बी. एस. बालाजी ने अपने व्याख्यान में एआई युग में पाठ्यक्रम निर्माण की बदलती अवधारणाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पारंपरिक पाठ्यक्रम तेजी से अप्रासंगिक होते जा रहे हैं और उनकी जगह मॉड्यूलर, इंटरडिसिप्लिनरी तथा टेक्नोलॉजी-इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों की आवश्यकता है। एआई आधारित टूल्स के माध्यम से शिक्षार्थियों की सीखने की गति एवं रुचि के अनुसार सामग्री का अनुकूलन संभव है। प्रो. बालाजी ने आगे बताया कि ओपन एवं डिस्टेंस लर्निंग में वर्चुअल लैब्स, सिमुलेशन और डिजिटल कंटेंट का समावेश शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाता है। उन्होंने “Outcome-Based Education (OBE)” दृष्टिकोण को अपनाने और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही शिक्षकों को एआई साक्षरता (AI Literacy) से सुसज्जित करने की भी आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भविष्य का पाठ्यक्रम गतिशील (Dynamic) होना चाहिए, जिसमें उद्योग एवं समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर संशोधन किया जाता रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के औपचारिक स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन देते हुए CIQA के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यक्रमों का पुनर्रचना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई युग में पाठ्यक्रम केवल ज्ञान तक सीमित न रहकर कौशल, नवाचार और समस्या-समाधान आधारित होना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन, मुख्य वक्ता का परिचय एवं धन्यवाद ज्ञापन अर्थशास्त्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. शालिनी चौधरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकगण उपस्थित रहे और विषय से संबंधित जिज्ञासाओं पर सक्रिय सहभागिता दिखाई। अंत में प्रो. बी. एस. बालाजी द्वारा शिक्षकों के लिए एआई के अनुप्रयोगों पर एक प्रायोगिक सत्र भी आयोजित किया गया। यह विशेष व्याख्यान शिक्षकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ तथा विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण एवं तकनीक-सम्मत शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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