पीओएसएच अधिनियम 2013 पर एक दिवसीय कार्यशाला
पीओएसएच अधिनियम 2013 पर एक दिवसीय कार्यशाला
आज दिनांक 07 फरवरी 2026 को उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केन्द्र, आंतरिक शिकायत समिति एवं महिला शिकायत निवारण प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में पीओएसएच अधिनियम 2013 पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल देना, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकना और नियंत्रित करना, शिकायतों को सुनने और निवारण के लिए प्रभावी तंत्र बनाना, हर प्रकार के श्रम, पब्लिक या प्राइवेट कार्यस्थल को कवर करना, काम से जुड़े वातावरण में लैंगिक भेदभाव से सुरक्षा देना है। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद लोहानी जी के संरक्षण में यह कार्यक्रम संचालित हो रहा है। कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ कर इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे, संयोजक समान अवसर प्रकोष्ठ एवं निदेशक अकादमी प्रो. पी. डी.पन्त, संयोजन महिला अध्ययन केंद्र एवं निदेशक समाजविज्ञान विद्याशाखा प्रो. रेनू प्रकाश, कार्यक्रम समन्वयक प्रो. डिगर सिंह फर्सवान, आयोजन सचिव एवं अन्य समितियों ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवेश प्रो. रेनू प्रकाश ने अपने उद्बोधन में कार्यशाला के बारे में कहा कि पॉश एक्ट 2023 से आमतौर पर वह POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून समझा जाता है जो 2013 में भारत में लागू हुआ था लेकिन 2023-25 के वर्षों में इसके कार्यान्वयन, कोर्ट के फैसलों और अनुपालन से जुड़ी चर्चाएँ/निर्देश जारी हुए हैं। यह कानून महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाने, रोकने, और शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। इसे भारत में 9 दिसंबर 2013 से लागू किया गया।
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. डिगर सिंह फर्सवान जी अपने वक्तव्य में कहा कि पॉश (POSH) एक्ट 2013 (यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण) संगोष्ठी कार्यस्थल को महिलाओं के लिए सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक बनाने पर केंद्रित है। यह 10 या अधिक कर्मचारियों वाले सभी निजी/सरकारी संगठनों में आंतरिक समिति (IC) के गठन, जागरूकता कार्यक्रमों और यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
संयोजक समान अवसर प्रकोष्ठ एवं निदेशक अकादमी प्रो. पी. डी.पन्त उन्होंने POSH अधिनियम और इसके मूल नियम: प्रभाव बनाम इरादा, के बारे में भी समझाया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपमानजनक व्यवहारों और उनसे निपटने के तरीकों पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि एवं वक्ता श्रीमती हीरा जंगपांगी, प्रेसिडेंट महिला कल्याण संस्थान, उधम सिंह नगर ने अपने उद्बोधन में कार्यशाला के बारे में कहा कि POSH नीति समानता को मान्यता देती है। इस अधिनियम के लागू होने से महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को उनके लिंग की परवाह किए बिना समान अवसर और उचित व्यवहार प्राप्त होगा, और वे कार्यस्थल पर स्वतंत्र रूप से काम कर सकेंगे, जिससे सकारात्मकता बढ़ेगी और सभी लिंगों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण बनेगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कार्यक्रम के संरक्षक प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी जी के संरक्षण में यह कार्यक्रम संचालित हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे जी अपने वक्तव्य में कहा कि यह कार्यशाला नियोक्ताओं और कर्मचारियों को उनके कानूनी दायित्वों और अधिकारों के बारे में शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो एक उत्पादक और सुरक्षित कार्य वातावरण को बढ़ावा देती है। पूरे भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका प्रमुख कार्य महिलाओं को प्राकृतिक अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करना है।
कार्यशाला में तकनीकी सत्र का अयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता कार्यक्रम समन्वयक प्रो. डिगर सिंह फर्सवान जी ने किया जिन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि हमें इस एक्ट के लिए आत्म चिंतन करना होगा, मुख्य वक्ता श्रीमती हीरा जंगपांगी ने कहा कि आधुनिक युग में, कंपनियां प्रगतिशील हैं, जहां कार्यस्थल पर महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का समान रूप से स्वागत किया जाता है। इसलिए, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार के यौन या मानसिक उत्पीड़न से बचने और एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाने के लिए कार्यस्थल पर POSH नीति लागू करना आवश्यक है। इस अवसर पर विभिन्न चर्चाओं एवं संवाद के माध्यम से प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया। सत्र का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ। सत्र का संचालन डॉ. नागेंद्र गंगोला ने किया, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीरज जोशी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी निदेशक गण, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी, कुलसचिव, प्रो. राकेश रयाल, डॉ. घनश्याम जोशी, डॉ. शशांक शुक्ल, डॉ. द्विजेश उपाध्याय, श्रीमती दीपा फुलारा, डॉ.नमीता वर्मा, विकास जोशी, ऋतंभरा नैनवाल, शैलजा, भावना धोनी तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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