Message from the Vice Chancellor

मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा (ODL) आज संपूर्ण विश्व का एक शक्तिशाली माध्यम बन गया है। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से ज्ञानवर्द्धक व रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 2005 में राज्य विधान सभा के अधिनियम 23 के अंतर्गत हुई। यह सरकार का एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है। यह अपनी भौगोलिक पहुंच में प्रदेश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणालियों के माध्यम से उच्च शिक्षा को प्रदेश के दूर-दराज के सीमांत क्षेत्रों, विशेषकर पहाड़ी भू-भाग के अन्दरूनी क्षेत्रों तक पहुँचाना है।
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के प्रारंभिक वर्षों में ही उच्चतर अकादमिक परिसर की स्थापना की है। हमने प्रदेश के अध्येताओं के सामने एक रचनात्मक विकल्प रखा है, जो लचीलेपन और ज्ञानार्जन की व्यावहारिक विशेषताओं से युक्त है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने गुणवत्तापरख शिक्षा प्रदान करने का एक लंबा सफर तय किया है, जिसमें होटल के कमरे से शुरू करके स्वयं का 25 एकड़ का परिसर, कुछ सौ से अब तक लगभग 60,000 छात्रों की संख्या, इग्नू, वीएमओयू और अन्य विश्वविद्यालयों पर अपनी अध्ययन सामग्री की निर्भरता कम कर अपनी स्वयं की अध्ययन सामग्री का 90% इन-हाउस उत्पादन, राज्य के द्वितीय विश्वविद्यालय का पुरस्कार प्राप्त करना जैसी कई उपलब्धियां सम्मिलित हैं। हम अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें एक जीवंत छात्र सहायता प्रणाली प्रदान करने हेतु हमारे पूर्ण विकसित डेटा सेंटर, वर्चुअल क्लास रूम, रिकॉर्डिंग स्टूडियो, कम्युनिटी रेडियो और टोल-फ्री नंबर सुचारू रूप से काम कर रहे हैं।
हम उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से, उत्तराखण्ड की प्राकृतिक, भौगोलिक बाधाओं के बावजूद, उच्च शिक्षा को हर घर के दरवाजे तक पहुँचाने व उत्तराखण्ड से पलायन को रोकने का राज्य का सपना साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। उत्तराखण्ड के विद्यार्थियों का ज्ञान के प्रति प्रेम ही हमारे स्वप्न का आधार है। यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय एक शानदार उपहार है, जिसे राज्य सरकार ने प्रदेश के लोगों को दिया है। हमें अभी भी एक लंबा सफर तय करना है, और इसके लिए हमें आप सभी के सहयोग और ऊर्जा की जरूरत है।
आइए! हम उत्तराखण्ड राज्य के उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हों।
शुभकामना सहित।
(प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी)
कुलपति
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