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उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में "महिला आयोग : भूमिका, चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में "महिला आयोग : भूमिका, चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

Program
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में "महिला आयोग : भूमिका, चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आज दिनांक 17 जुलाई 2026 को उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय भवन में "महिला आयोग : भूमिका, चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, शोधार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रोफेसर पी. डी. पंत, निदेशक अकादमिक ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि समावेशी एवं न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे विषयों पर सतत संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जिससे समाज में लैंगिक समानता की भावना और अधिक सुदृढ़ हो। कार्यक्रम की रूपरेखा एवं विषय प्रवेश प्रोफेसर रेनू प्रकाश, निदेशक, समाज विज्ञान विद्याशाखा एवं महिला अध्ययन केंद्र ने ने अपने उद्बोधन में कार्यशाला के बारे में कहा कि महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, न्याय सुनिश्चित करने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में आयोग की भूमिका और भी अधिक व्यापक एवं प्रभावी हुई है तथा इस विषय पर अकादमिक विमर्श समय की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता डॉ. पलक मित्तल, राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपने उद्बोधन में महिला आयोग की संवैधानिक एवं वैधानिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किस प्रकार महिलाएं अपने सोच से बदलाव कर सकती है। महिला आयोग की प्रमुख भूमिका सुरक्षा संरक्षण एवं सशक्तिकरण है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, बाल विवाह तथा महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनों एवं आयोग की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ उपलब्ध कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से लैंगिक समानता एवं सम्मान की संस्कृति विकसित करने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि श्रीमती कुसुम कंडवाल, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग ने कहा कि राज्य महिला आयोग महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान एवं न्याय दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। यह कार्य पिछले 23 वर्षों से अनवरत चल रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं तक आयोग की पहुँच बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने तथा शिक्षा एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज, प्रशासन एवं शैक्षणिक संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से ही महिलाओं के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहकर सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने महिला अध्ययन एवं लैंगिक समानता से जुड़े विषयों पर अनुसंधान एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर बल दिया। प्रोफेसर डिगर सिंह फर्सवान, कार्यक्रम सह-संयोजक एवं निदेशक, शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने वक्त अभी में कहा कि हमें अपने परिवार एवं समाज स्तर पर इस समस्या पर विचार मंथन करना होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेन्द्र गंगोला ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी निदेशक गण (प्रो. गिरि‍जा पांडे, प्रो. जीतेंद्र पांडे, प्रो. गगन सिंह, प्रो. मंजरी अग्रवाल, प्रो. आशुतोष भट्ट, प्रो.अरविंद भट्ट), प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी एवं महिला आयोग के विभिन्न अधिकारी गण सहित डॉ. शशांक शुक्ला, डॉ. नीरजा सिंह, डॉ. कल्पना लखेरा, डॉ. सीता, डॉ. ज्योति रानी, डॉ. नमिता वर्मा, डॉ. नीरज जोशी, डॉ. गोपाल गौनिया, श्रीमती शैलजा, डॉ. किशोर कुमार, डॉ. द्विजेश उपाध्याय, डॉ. लता जोशी, श्रीमती कुशा सिंह, श्री तरूण नेगी, डॉ. संपत्ति नेगी, श्री विकास जोशी, डॉ.भावना धौनी, डॉ. रंजू जोशी पाण्डे, डॉ. ललित मोहन पन्त, श्री गौरव उपाध्याय, श्री सुमि‍त सिं‍ह, श्री दिग्विजय पथनी, सुश्री ऋतंभरा नैनवाल, डॉ. पुष्पा बुधलाकोटी, डॉ. जगमोहन परगाई, डॉ. प्रभाकर पुरोहित, श्री मानस त्रिपाठी, श्री प्रकाश सनवाल, श्री हरीश गोयल, श्री राजेश आर्या, श्री मोहित रावत, श्री विभु कांडपाल, श्री अनिल, लता मेर, सोनू भट्ट, सुश्री रेनू भट्ट, प्रमोद कुमार, सहित विश्वविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

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