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हरेला महोत्सव: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में हरेला महोत्सव के तृतीय दिवस मियावाकी वन स्थापना के लिए हुआ पौधारोपण

हरेला महोत्सव: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में हरेला महोत्सव के तृतीय दिवस मियावाकी वन स्थापना के लिए हुआ पौधारोपण

Program
हरेला महोत्सव: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में हरेला महोत्सव के तृतीय दिवस मियावाकी वन स्थापना के लिए हुआ पौधारोपण। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपरा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक हरेला महोत्सव के अंतर्गत उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में गुरुवार को तीसरे दिन विश्वविद्यालय परिसर में मियावाकी पद्धति से वन स्थापना के उद्देश्य से वृहद पौधारोपण अभियान चलाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट जी ने पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रोफेसर बिष्ट जी ने कहा कि मानसून का वर्तमान समय वैज्ञानिक दृष्टि से वनों की स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। यदि स्थानीय एवं देशज प्रजातियों का रोपण वैज्ञानिक पद्धति से किया जाए तो कम समय में सघन एवं समृद्ध वन विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा मियावाकी पद्धति से वन विकसित करने की पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम बताया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी जी ने कहा कि हरेला महोत्सव के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने विभिन्न विद्याशाखाओं, विभागों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं शिक्षार्थियों की सहभागिता से 500 पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के सभी विद्याशाखाओं के सामूहिक सहयोग से यह लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा होगा तथा परिसर में एक समृद्ध हरित वातावरण विकसित होगा। उन्होंने आवाह्न किया कि पौधारोपण के साथ-साथ प्रत्येक पौधे का संरक्षण एवं संवर्धन भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के संयोजक एवं वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एच. सी. जोशी ने मियावाकी वन पद्धति की जानकारी देते हुए बताया कि इस तकनीक में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को सघन रूप से लगाया जाता है, जिससे कम क्षेत्र में कम समय में प्राकृतिक वन पारितंत्र विकसित होता है। उन्होंने बताया कि यह पद्धति जैव विविधता संरक्षण, कार्बन अवशोषण तथा हरित आवरण बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी है। आज आँवला, तिमिल, सहजन, तेजपात एवं रीठा सहित विभिन्न देशज एवं बहुउपयोगी वन प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। इस अभियान में भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्याशाखा, तथा विज्ञान विद्याशाखा के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आज के कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता श्री मनोज पाठक, मनमोहन जोशी, प्रभाकर जोशी एवं मयंक जोशी ने भी विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर अभियान में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई तथा पर्यावरण संरक्षण के इस जन-अभियान को सफल बनाने का संदेश दिया। पौधारोपण करने वालों में प्रोफेसर पी.डी. पंत, डॉ. एच.सी. जोशी, डॉ. वीरेन्द्र कुमार, प्रोफेसर अरविन्द भट्ट, प्रोफेसर आशुतोष भट्ट, डॉ. विशाल सिंह, डॉ. एस.एन. ओझा, डॉ. प्रीति बोरा, डॉ. बीना फुलारा, डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. नेहा तिवारी, डॉ. प्रीति पंत, डॉ. दीप्ति नेगी, डॉ. खष्टी दसीला, डॉ. रंजू पाण्डेय, डॉ. लता जोशी, डॉ. एस.एस. कुंजवाल, डॉ. प्रदीप पंत, डॉ. सुधांशु वर्मा तथा डॉ. धीरज पंत प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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