उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति जी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 के महत्व और पारदर्शिता को सर्वोच्चता पर रखने का संदेश देते हुए, विश्वविद्यालय के 8 क्षेत्रीय कार्यालयों के सहायक क्षेत्रीय निदेशकों और परिसर कार्यालय के प्रभारी निदेशक को सहायक लोक सूचना अधिकारी का दायित्व प्रदान करते हुए कार्यालयों में नये सूचना पटो को अधिक जानकारी के समावेश के साथ लोकार्पण किया।
कुलपति जी ने इस अवसर पर बताया कि
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का मूल उद्देश्य शासन एवं प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा जनसहभागिता को बढ़ावा देना है। इस अधिनियम की धारा 4 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी लोक प्राधिकरणों को नागरिकों द्वारा सूचना माँगे जाने की प्रतीक्षा किए बिना महत्वपूर्ण सूचनाओं का स्वप्रेरित (Suo Motu) प्रकटन करने के लिए बाध्य करती है। धारा 4(1)(b) के अंतर्गत संगठन की संरचना, कार्य एवं दायित्व, अधिकारियों की शक्तियाँ, निर्णय प्रक्रिया, नियमावली, बजट, कर्मचारियों का विवरण, लोक सूचना अधिकारियों की जानकारी तथा अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएँ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। धारा 4(2) के अनुसार लोक प्राधिकरणों का यह सतत प्रयास होना चाहिए कि अधिकतम सूचनाएँ स्वतः उपलब्ध कराई जाएँ, जिससे नागरिकों को सूचना प्राप्त करने के लिए आरटीआई आवेदन देने की आवश्यकता न्यूनतम हो।
सूचनाओं के स्वयं प्रकटन हेतु उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप अपने आधिकारिक पोर्टल पर विभिन्न प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वित्तीय सूचनाओं को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय का 17 विन्दुओं की हस्त-पुस्तिका (RTI Manual) अद्यतन कर विश्वविद्यालय की वेब साईट पर उपलब्ध है, जिसके अन्तर्गत विश्वविद्यालय की संगठनात्मक संरचना, अधिनियम एवं परिनियम, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का विवरण, बजट एवं वित्तीय जानकारी, निविदाएँ, वार्षिक प्रतिवेदन, परीक्षा संबंधी सूचनाएँ, अध्ययन सामग्री, लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का विवरण तथा धारा 4(1)(b) के अंतर्गत अपेक्षित विभिन्न सूचनाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आम नागरिकों को आवश्यक जानकारी सहज रूप से प्राप्त होती है तथा विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बल मिलता है।
इस प्रकार, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 4 के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता एवं जनहितकारी प्रशासन की दिशा में एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं विभागीय अपीलीय अधिकारी खेमराज भट्ट और सूचना अधिकार प्रकोष्ठ के कार्मिक मन मोहन त्रिपाठी और श्रीमती लक्ष्मी धामी उपस्थित रहे।