जिला कारागार हरिद्वार में कैदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का अभियान, यूओयू ने जुलाई 2026 प्रवेश सत्र हेतु चलाया जागरूकता कार्यक्रम
जिला कारागार हरिद्वार में कैदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का अभियान, यूओयू ने जुलाई 2026 प्रवेश सत्र हेतु चलाया जागरूकता कार्यक्रम
/ June 09, 2026
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pawankumar
on June 9, 2026
जिला कारागार हरिद्वार में कैदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का अभियान, यूओयू ने जुलाई 2026 प्रवेश सत्र हेतु चलाया जागरूकता कार्यक्रम
हरिद्वार। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, रुड़की क्षेत्रीय केंद्र के अंतर्गत जिला कारागार हरिद्वार में सोमवार को जुलाई 2026 प्रवेश सत्र के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कारागार में निरुद्ध बंदियों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित करना तथा उन्हें विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षिक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जोड़ना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कैदियों एवं कारागार कर्मचारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर डिप्टी जेलर स्वेता जोशी ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि कारागार में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा न केवल कैदियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि जेल में उनके समय का सकारात्मक एवं रचनात्मक उपयोग भी सुनिश्चित करेगी।
इस अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बृजेश बनकोटी ने कहा कि विश्वविद्यालय समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कारागार में निरुद्ध व्यक्तियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय विशेष पहल कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रम कैदियों के ज्ञान, कौशल एवं व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा उनके भविष्य को नई दिशा प्रदान करेंगे।
डॉ. बनकोटी ने जानकारी दी कि कैदियों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा निःशुल्क शिक्षा, अध्ययन सामग्री एवं पुस्तकों की व्यवस्था की गई है। साथ ही समय-समय पर उनकी शैक्षणिक काउंसलिंग एवं मार्गदर्शन भी किया जाएगा, जिससे वे अपनी पढ़ाई को सफलतापूर्वक पूर्ण कर सकें।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यदि कैदी कारागार में रहते हुए शिक्षा ग्रहण करते हैं, तो रिहाई के बाद वे समाज के जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण एवं सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने सभी कैदियों से विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. ललित मोहन पंत ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय वर्तमान में 100 से अधिक पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहा है। इसके अतिरिक्त अनेक प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) एवं डिप्लोमा कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं, जो रोजगार एवं स्वरोजगार की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं।
प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए अधिकांश शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन ऑनलाइन माध्यम से कर रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों एवं विशेष परिस्थितियों में रहने वाले शिक्षार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. आशुतोष भट्ट ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सकारात्मक सोच का आधार है तथा यह जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोलती है। उन्होंने कैदियों को शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने कैदियों को प्रवेश प्रक्रिया, उपलब्ध पाठ्यक्रमों, निःशुल्क सुविधाओं तथा भविष्य में मिलने वाले शैक्षणिक लाभों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में कैदियों ने विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने की रुचि व्यक्त की।