“संस्थागत वित्तीय प्रबंधन: बिल प्रस्तुतीकरण, लेखा परीक्षा और आपत्ति निराकरण” विषय पर क्षमता वर्धन कार्यशाला संपन्न
“संस्थागत वित्तीय प्रबंधन: बिल प्रस्तुतीकरण, लेखा परीक्षा और आपत्ति निराकरण” विषय पर क्षमता वर्धन कार्यशाला संपन्न
/ June 04, 2026
Submitted by
pawankumar
on June 4, 2026
“संस्थागत वित्तीय प्रबंधन: बिल प्रस्तुतीकरण, लेखा परीक्षा और आपत्ति निराकरण” विषय पर क्षमता वर्धन कार्यशाला संपन्न; ऑडिट की बारीकियों पर मंथन
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और अकादमिक ढांचे को अधिक पारदर्शी, कुशल और वित्तीय रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज, 3 जून 2026 को, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (CIQA) द्वारा क्षमता वर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। माननीय कुलपति जी की गरिमामयी अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय 'संस्थागत वित्तीय प्रबंधन: बिल प्रस्तुतीकरण, लेखा परीक्षा और आपत्ति निराकरण' था । निदेशक CIQA,प्रोफेसर गिरिजा प्रसाद पांडे जी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया | तथा कार्यशाला का महत्व एवं उदेश्यपर प्रकाश डाला । मुख्य वक्ता डॉ. ए. के. दीक्षित (पूर्व उपनिदेशक, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग, इलाहाबाद) ने अपने व्याख्यान में बिलों के सही ढंग से प्रस्तुतीकरण और ऑडिट के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अक्सर प्रक्रियाओं की सही जानकारी न होने के कारण ऑडिट आपत्तियां (Audit Objections) खड़ी होती हैं, जिससे न केवल विकास कार्य प्रभावित होते हैं बल्कि संस्थान की छवि पर भी असर पड़ता है। डिजिटल युग में वित्तीय नियमों की सटीकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि बिल प्रस्तुतीकरण के समय ही सभी गाइडलाइंस का पालन कर लिया जाए, तो ऑडिट आपत्तियों से बचा जा सकता है। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से कार्मिकों को समझाया कि किसी भी वित्तीय आपत्ति (Objection) का समय पर और तार्किक निराकरण कैसे किया जाए।
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे माननीय कुलपति जी ने अपने संबोधन में वित्तीय साक्षरता और अनुशासन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता भी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। कुलपति जी ने बताया कि सभी नियमित शिक्षकों और कार्मिकों की उपस्थिति अनिवार्य इसलिए की गई ताकि भविष्य में किसी भी स्तर पर वित्तीय प्रक्रियाओं में "अनभिज्ञता" न रहे।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में एक 'प्रश्नकाल/शंका समाधान' (Q&A Session) का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने वित्तीय नियमों, टीए/डीए बिलों, और परचेज ऑर्डर्स से जुड़े अपने संशयों को मुख्य वक्ता के सामने रखा। डॉ. दीक्षित ने बेहद सरल और विधिक तरीके से सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यशाला के अंत में CIQA के अतिरिक्त निदेशक प्रोफेसर गगन सिंह द्वारा माननीय कुलपति जी, मुख्य वक्ता डॉ. दीक्षित और सभी उपस्थित संकाय सदस्यों व कार्मिकों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के सभी नियमित शिक्षकों, विभागाध्यक्षों और प्रशासनिक अधिकारी / कार्मिकों ने प्रतिभाग किया।