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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

Program

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में महिला अध्ययन केंद्र एवं समान अवसर प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में 12 मार्च 2026 को एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “सहयोग से सशक्त समाज : एक विमर्श” रहा, इस संगोष्ठी का उद्देश्य समाज में महिला सशक्तिकरण, समान अवसर और समावेशी विकास पर विचार-विमर्श करना है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम “Give to Gain” को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न विद्वान, शिक्षाविदों ने अपने विचार इस संगोष्ठी में प्रस्तुत किए।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद लोहानी जी के संरक्षण में यह कार्यक्रम संचालित हुवा। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुवा। यह आयोजन विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में किया गया। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय परिवार के साथ-साथ विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर महिलाओं की भूमिका, समाज में उनकी भागीदारी, शिक्षा और समान अवसरों के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गयी।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवेश प्रो. रेनू प्रकाश, महिला अध्ययन केंद्र एवं निदेशक, समाज विज्ञान विद्याशाखा ने किया उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिदृश्य में महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर ऐसी पहल करनी चाहिए, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और नेतृत्व के लिए सक्षम बनाए। उनके अनुसार, सहयोग और समानता की भावना से ही एक सशक्त और संतुलित समाज का निर्माण किया जा सकता है।
कार्यक्रम में समान अवसर प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. पी. डी. पंत, निदेशक आकादमिक ने कार्यक्रम के उद्देश्य और इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में सहयोग, समानता और समावेशिता के मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। उनके अनुसार सहयोग से ही एक सशक्त समाज की परिकल्पना की जा सकती है और परिवार इस प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, जहाँ से समानता, सम्मान और सहयोग के संस्कार विकसित होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में समानता, सहयोग और परस्पर सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ व्यापक समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।
विशिष्ट अतिथि के रूप में  प्रो. मधु नयाल, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विज्ञान विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोडा ने अपने उद्बोधन में में कहा कि अनुभवों के आधार पर समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, नेतृत्व और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खुशहाल व्यक्ति ही खुशहाल समाज का निर्माण कर सकता है। इसलिए परिवार, समाज और शिक्षा संस्थानों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ सहयोग, संवेदनशीलता और सकारात्मकता को बढ़ावा मिले।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. ऋतु रखोलिया, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडीकल कालेज, हल्द्वनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके लोगों के परस्पर सहयोग, संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना में निहित होती है। उन्होंने कहा कि जब समाज के विभिन्न वर्ग—शिक्षक, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक—एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तभी स्वस्थ, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव हो पाता है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एक स्वस्थ और शिक्षित बाल पीढ़ी ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला होती है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की दो महिला कार्मिक, सुश्री आकांक्षा रावत एवं श्रीमती राखी को उनके उत्कृष्ट कार्यों और समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. डिंगर सिंह फर्सवान ने किया। सत्र का संचालन डॉ. नागेंद्र गंगोला ने किया, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सीता ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी निदेशक गण, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी, कुलसचिव, प्रो. राकेश रयाल, डॉ. घनश्याम जोशी, डॉ. नीरज जोशी, डॉ. द्विजेश उपाध्याय, डॉ.नमीता वर्मा, श्रीमती भावना धौनी, विकास जोशी, ऋतंभरा नैनवाल, शैलजा, डॉ. मनोज कुमार पांडे, डॉ. दिनेश कांडपाल, राजेश आर्य,  नवीन,  रेनू भट्ट, आदि मौजूद रहे।

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