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पोषण माह में एक दिवसीय ऑनलाइन पोषण कार्यशाला का आयोजन

Program
पोषण माह में एक दिवसीय ऑनलाइन पोषण कार्यशाला का आयोजन उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग द्वारा पोषण माह के अंतर्गत एक दिवसीय ऑनलाइन पोषण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी जी ने की। कार्यशाला का उद्देश्य पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों के समग्र विकास, स्वस्थ जीवनशैली तथा पोषण संबंधी व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रतिभागियों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। कार्यशाला के प्रारंभ में निदेशक, स्वास्थ्य विज्ञान विद्याशाखा प्रोफेसर मंजरी अग्रवाल ने पोषण माह की मुख्य विषय एवं उप-विषय पर प्रकाश डालते हुए पोषण माह की पृष्ठभूमि एवं इसके विकासक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पोषण संबंधी जागरूकता को केवल एक अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन के व्यवहार से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने वर्तमान समय में सोशल मीडिया एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से पोषण संबंधी सही एवं वैज्ञानिक जानकारी के प्रसार की संभावनाओं पर चर्चा की। कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. रीता सिंह रघुवंशी, पूर्व अधिष्ठाता (सेवानिवृत्त) सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, गो.ब.पंत कृ. एवं प्रौ. विश्वविद्यालय (पंतनगर) ने ‘बाल्यावस्था विकास के लिए पोषण और शुरुआती प्रोत्साहन’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बाल विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों पर चर्चा करते हुए बताया कि जीवन के पहले छह वर्ष बच्चे के शारीरिक, मानसिक, संज्ञानात्मक, भाषायी, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने बाल विकास के विभिन्न आयामों तथा उनमें पोषण की भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने पालन- पोषण की अवधारणा पर बल व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों के समुचित विकास के लिए केवल पर्याप्त एवं संतुलित भोजन ही नहीं, बल्कि स्नेह, संवाद, देखभाल और सकारात्मक पारिवारिक वातावरण भी आवश्यक है। द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ० मनीषा काराकोटी, सहायक प्राध्यापक, गृह विज्ञान महाविद्यालय, राजकीय डिग्री कॉलेज, कांडा (बागेश्वर) ने ‘पोषण की शक्ति को जानें’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संतुलित आहार में विभिन्न पोषक तत्वों जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण, फाइबर एवं जल के महत्व को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के लिए किसी एक पोषक तत्व पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न खाद्य समूहों का संतुलित संयोजन आवश्यक है। डॉ. मनीषा ने पोषण एवं प्रतिरक्षा, स्वस्थ वजन प्रबंधन, पर्याप्त जल सेवन, फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थों तथा स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को यह संदेश दिया कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए छोटे-छोटे दैनिक व्यवहारों में निरंतर सकारात्मक परिवर्तन अधिक प्रभावी हो सकते हैं। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में माननीय कुलपति महोदय ने कहा कि पोषण केवल भोजन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण आयाम है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा पोषण तथा बच्चों के समग्र विकास पर विशेष फोकस किया जाना सराहनीय है। उन्होंने बच्चों के प्रारंभिक वर्षों में उचित पोषण, देखभाल, संवाद एवं सकारात्मक वातावरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वस्थ एवं सक्षम समाज के निर्माण की नींव बचपन में ही रखी जाती है। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए निदेशक स्वास्थ्य विज्ञान विद्याशाखा, गृह विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों एवं आमंत्रित विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना की तथा प्रतिभागियों से प्राप्त जानकारी को अपने परिवार एवं समुदाय तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यशाला में विभिन्न संकायों के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन गृह विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक श्रीमती मोनिका द्विवेदी द्वारा किया गया। डॉ० दीपिका वर्मा द्वारा विषय विशेषज्ञों का परिचय दिया गया। कार्यशाला के अंत में डॉ० प्रीति बोरा द्वारा आयोजकों द्वारा सभी विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय प्रशासन एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में गृह विज्ञान विभाग के संकाय सदस्यों डॉ० दीपिका वर्मा, डॉ० प्रीति बोरा, श्रीमती मोनिका द्विवेदी और डॉ० ज्योति जोशी, तकनीकी विशेषज्ञ श्री राजेश आर्या और श्री विभु कांडपाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।