भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्याशाखा
निदेशक: प्रो. पी. डी. पंत
भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्याशाखा (School of Earth and Environmental Science) एक वैज्ञानिक समुदाय है, जो पृथ्वी तथा अंतरिक्ष में उसके पड़ोसी पिंडों का अध्ययन करता है। यह विद्यालय एक विविध, समावेशी पर्यावरण प्रदान करने का उद्देश्य रखता है, जो खुले विचारों वाले आलोचनात्मक चिंतन और विमर्श को प्रोत्साहित करता है तथा वैज्ञानिक रूप से साक्षर और जागरूक समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। इन उद्देश्यों को साझा करने वाले सभी लोगों का विद्यालय स्वागत करता है। पृथ्वी एवं पर्यावरणीय प्रक्रियाओं तथा मानव-पर्यावरण अंतःक्रियाओं पर नवीन ज्ञान का सृजन करता है, पर्यावरण एवं जलवायु नीति के लिए वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है, पृथ्वी एवं पर्यावरण वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करता है तथा विद्यार्थियों और समाज के हित में ज्ञान एवं समाधान का प्रसार करता है। क्षेत्रीय, उपकरणात्मक, संगणनात्मक तथा मॉडलिंग दृष्टिकोणों का एक ही इकाई में समन्वय इसकी प्रमुख विशेषता है। SoEES विभिन्न विभागों एवं प्रयोगशालाओं के माध्यम से अंतर्विषयक अनुसंधान, शिक्षण तथा जनसंपर्क/विस्तार गतिविधियों को बढ़ावा देता है।
भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्याशाखा की स्थापना वर्ष 2018 में की गई थी। अल्प अवधि में ही विद्यालय ने विशेष रूप से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण एवं पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु उत्कृष्ट सुविधाएँ विकसित की हैं। विद्यालय में चार शिक्षण विभाग हैं— भूविज्ञान विभाग, वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, भूगोल एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन विभाग तथा रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस विभाग।
SoEES पर्यावरण विज्ञान, भूगोल एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स में चार स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करता है। इसके अतिरिक्त, विद्यालय ने करियर उन्मुख प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों के अंतर्गत जियोइन्फॉर्मेटिक्स में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया है।
SoEES एक अंतर्विषयक केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो एम.एससी. एवं पीएच.डी. उपाधियाँ प्रदान कर पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं में ज्ञान के अध्ययन एवं प्रसार का कार्य करता है। विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को विशेष प्रयोगशाला प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे उद्योगों एवं समाज द्वारा सामना की जा रही उभरती पर्यावरणीय समस्याओं का तकनीकी एवं पर्यावरणीय स्तर पर समाधान कर सकें। विद्यालय में एक प्रोफेसर, एक सहायक प्रोफेसर तथा पाँच सहायक प्रोफेसर (एसी) कार्यरत हैं।
विद्यालय के उद्देश्य
पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में पारंपरिक एवं नवीन विषयों के शिक्षण द्वारा विषय की समग्र समझ विकसित करना।
पाठ्यक्रम संरचना, पाठ्यक्रम सामग्री एवं अध्ययन सामग्री के नियमित अद्यतन के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा देना।
भूविज्ञान को जैविक, रासायनिक एवं भौतिक विज्ञानों से जोड़ते हुए शिक्षण एवं अनुसंधान में अंतर्विषयक ज्ञान को प्रोत्साहित करना।
पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में अवसरों एवं भविष्य की संभावनाओं के प्रति विद्यार्थियों को प्रेरित एवं जागरूक करना।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास करना तथा सहिष्णुता, प्रगतिशीलता एवं भाईचारे के मूल्यों का विकास करना।
विद्यालय के विभाग
भूविज्ञान विभाग
वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग
भूगोल एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन विभाग
रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस विभाग
शिक्षकगण
| वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग | एम.एससी. एवं बी.एससी. (पर्यावरण विज्ञान-वानिकी) एम.ए. (पर्यावरण अध्ययन) | प्रो. पी.डी. पंत |
| डॉ. एच.सी. जोशी | ||
| डॉ. प्रीति पंत | ||
| डॉ. बीना तिवारी फुलारा | ||
| डॉ. कृष्ण कुमार तम्टा | ||
| डॉ. दीप्ति नेगी | ||
| सुश्री नेहा तिवारी | ||
| डॉ. खश्ती दसिला | ||
| भूगोल एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन विभाग | एम.ए. एवं बी.ए. (भूगोल) | डॉ. रंजू जोशी पाण्डेय |
| डॉ. सुधांशु वर्मा | ||
| डॉ. प्रदीप कुमार पंत | ||
| डॉ. मोहन सिंह सम्मल | ||
| श्री धीरज पंत | ||
| रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस विभाग | एम.एससी. (जियोइन्फॉर्मेटिक्स) | श्री सुनील तिवारी |
| डॉ. हरिमोहन भंडारी | ||
| सुश्री निर्मला तरागी |
विज्ञान विद्यालय में संचालित कार्यक्रम
स्नातकोत्तर
मास्टर ऑफ साइंस (पर्यावरण विज्ञान) (MSCES)
मास्टर ऑफ साइंस / आर्ट्स (भूगोल) (MAGE/MSCGE)
मास्टर ऑफ साइंस (जियोइन्फॉर्मेटिक्स) (MAGIS/MSCGIS)
स्नातक
बैचलर ऑफ साइंस (BSCG)
बैचलर ऑफ साइंस (एकल विषय) (BSCS)
डिप्लोमा
नॉन वुड फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स में डिप्लोमा (DNWFP)
जियोइन्फॉर्मेटिक्स में डिप्लोमा (DGIS)
प्रमाणपत्र
नॉन वुड फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स में प्रमाणपत्र (CNWFP)
जियोइन्फॉर्मेटिक्स में प्रमाणपत्र (CGIS)
हैलो हल्द्वानी 

