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UTTARAKHAND OPEN UNIVERSITY

विश्वविद्यालय कुलगीत

University Kulgeet

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THE UNIVERSITY SONG

कुलगीत

जहाँ ज्ञान श्रद्धा से जुड़ता, जहाँ ज्ञान चेतना बसे;

जहाँ ज्ञान का योग निरन्तर, जहाँ ज्ञान से मुक्ति मिले,

जहाँ ज्ञान से बिछुड़ों की भी आशाओं के दीप जले;

जहाँ सभी को ज्ञान-यज्ञ में आहुति का अधिकार मिले।

पीठ ज्ञान की मुक्त लिये रोली-कुंकुम।

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं। श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं।।

पर्वत की श्रृंखला यहाँ दृढ़ता के पाठ पढ़ाती;

निर्मल जल-धारायें निसि-दिन कल-कल गीत सुनातीं,

भाँति-भाँति की औषधियाँ, फल-फूल, प्रकृति मुसुकाती;

देवभूमि की सुन्दरता से अमरावती लजाती।

पीठ ज्ञान की मुक्त लिये रोली-कुंकुम।

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं। श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं।।

परम्परायें यहाँ ज्ञान की, तपोभूमि भारत की;

ज्ञानभूमि है यही विवेकानन्द, आदि-शंकर की,

धरा यही ऋषियों-मुनियों की, योग-ध्यान साधन की;

बहीं शारदा, सरयू, यमुना, कोख यही सुरसरि की।

पीठ ज्ञान की मुक्त लिये रोली-कुंकुम।

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं। श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं।।

विद्या देती विनय-पात्रता, शुभ प्रसाद धन-सुख का;

ज्ञान मोक्ष का द्वार, यही उद्घोष देव-संस्‍कृति का,

नई विधायें, नई दिशायें, पथ नवीन आशा का;

मुक्‍त विश्‍वविद्यालय अपना, है अभियान प्रगति का।।

पीठ ज्ञान की मुक्त लिये रोली-कुंकुम।

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं। श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं।।

HISTORY OF THE KULGEET

विद्या परिषद एवं कार्य परिषद की बैठक दिनांक 23.04.2011 एवं 21.05.2011 में अनुमोदित।

उत्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय परिसर के शिलान्‍यास के अवसर पर दिनांक 23.05.2011 को प्रथम बार गाया गया।

कुलगीत के रचियिता

प्रोफेसर आर0सी0 मिश्र

निदेशक वाणिज्‍य एवं प्रबंध, पर्यटन आतिथ्‍य सेवा एवं होटल मैनेजमेन्‍ट तथा कुलसचिव, उत्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय।

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