पहाड़ के गांवों में उपेक्षित दृष्टिबाधित बच्चों को नैब मिला तो उनकी जिंदगी ही बदल गई। पूजा मेहता अल्मोड़ा के पास डीना पानी की रहने वाली हैं वह 75 फीसद दृष्टिबाधित हैं। नैब में इस वक्त वह एजुकेटर है उनके पास इस वक्त दर्जन भर डिग्रियां हैं। मुंबई से वह डीएलएड कर चुकी हैं सीटैट व यूटैट क्वालीफाइड हैं. इस वक्त उत्तराखंड मुक्त विवि से स्पेशल बीएड कर रही हैं। गांव में ही वह होती तो अभी एक उपेक्षित व निराश जीवन जी रही होती।यही कहानी पूजा रावत की है वह अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र की है। गांव में वह सभी के लिए अनउपयोगी थी पर पिछले 8 साल में नैब में हैं तो वह भी डीएलएड कर चुकी हैं और अन्य दृषिबाधित बच्चों को पढ़ा रही हैं। नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड्स (नैब संस्था) जो कि गौलापार हल्द्वानी में स्थित है श्याम धानिक जी इसे संचालित कर रहे हैं। सुदूर पहाड़ के दृष्टबाधित बच्चों की जिंदगियों में रोशनी लाने का काम यह कर रही है। आज इन दो एजुकेटर की जीवन अनुभव सुनते हैं आपके अपने रेडियो हैलो हल्द्वानी में रेडियो जर्नलिस्ट सुनीता भास्कर के सा
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