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अंग्रेजों के वक्त से जंगलों में 16-16 मीटर चौड़ी अग्नि बटियाएं हुआ करती थी जिसे फायर कंट्रोल लाइन कहते हैं जंगलों का सर्वे कर ये बनायी जाती थी ताकि जंगल की आग बेकाबू हो जाए तो इन बटियाओं पर आकर वह खुद ब खुद बुझ जाए। पर दुखद है कि आज ये बटियाएं लगभग खत्म हो गई हैं न ही इन्हें बरकरार रखा गया और न ही नई बटियाएं बनाई गई। जबकि वन विभाग में हर साल इन बटियाओं को साफ करने के लिए बजट आते रहा है लेकिन आज इन पुरानी बटियाओं की हालत यह है कि इन सब में पेड़ उग आए हैं और उन पेड़ों की तादात लाखों में है। वन महकमे के अधिकारी कहते हैं कि अब इन लाखों की संख्या के पेड़ों को कैसे काटें। बटियाओं में जब ये पेड़ उग रहे थे बड़े हो रहे थे तब महकमा कहां सोया था और बजट कहां खपाया गया कोई जवाब इसका नहीं है। ये कहना है वनाधिकारी कार्यकर्ता ईश्वर चन्द्र जोशी का। जो कि अल्मोड़ा के ताकुला क्षेत्र के बसोली में रहते हैं पिछले तीस सालों से वनों को लेकर वन कानूनों को लेकर स्थानीय लोगों के हक हकूकों को लेकर काम कर रहे हैं. अग्नि बटियाओं को वह जंगल का आग को रोकने का एक मौलिक तरीका बताते हैं जिसे की ठीक से पालन करना चाहिए। दूसरी वजह पर वन विभाग की ओर से पौधारोपण के जरिये लगाई गई चीड़ को मानते हैं। उनका कहना है कि 2003 के जीओ जारी होने के बाद वन विभाग की नर्सरी से चीड़ के पेड़ों को हटाया गया तब तक विभाग खुद ही चीड़ के पेड़ लगा रहा था। तीसरी वजह वह लोगों के टिंबर अधिकारों को खत्म करने को मानते हैं। कहते हैं कि अंग्रेजों के समय लोगों को मकान, खेती के औजार व गौशाला बनाने के लिए टिंबर अधिकार मिला करते थे जिसे आज खत्म कर दिया गया है साथ ही वन कानून के तहत गांव वाले जंगल से वन उपज तक नहीं ला सकते।एक बड़ी चिंता वह इस पर जताते हैं कि वन महकमें में वन संरक्षक तो खूब भर दिये पर असल में जमीन पर जंगल पर काम करने वाले कार्मिकों की बेहद कमी है 30-40 किलोमीटर के क्षेत्र को एक फारेस्ट कार्ड है और एक फारेस्ट गार्ड कई स्थानों पर दो तीन लोगों की बीट देख रहा है। फॉयर वाचर ऐसे रखे हैं जिन्हें स्थानीय लोग जानते ही नहीं है। बहुत विस्तार के साथ बहुत से अनुभव उन्होंने अपने साझा किये। आईये अपने जंगल बचाएं श्रृंखला के सातंवे एपिसोड में सुनते हैं उन्हें रेडियो जर्नलिस्ट सुनीता भास्कर के साथ में।

Audio file

Forest Fire Episode 7.mp3

External Expert
Participants
Sunita Bhaskar (RJ)
Language
Hindi
Format
Talk