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आज जंगल का पूरा कंपोजिशन बदल गया है पेड़ों का आपसी अनुपात गड़बड़ा गया है। चीन का मोनोकल्चर हो गया है। चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों की पत्तियां तो गल कर खुद खाद व नमी में कन्वर्ट हो जाती हैं लेकिन चीड़ का पिरुल न तो गलता है ना ही धरती को नमी देता है। नमी जंगल का एक आवश्यक गुण है। आज जंगलों की प्रतिरोधक क्षमता का क्षरण हो गया है ये कहना है विनोद कुमार पांडे का जो कि वन विकास निगम से सेवानिवृत हैं। एक वन विशेषज्ञ, पर्यावरणकर्मी, संस्कृतिकर्मी, ट्रैकर व फोटोग्राफर हैं। विनोद कुमार पांडे आग की घटनाओं की प्रमुख वजहों में स्थानीय लोगों की जंगल में शून्य भागीदारी, प्री मानसून का न आना, चीड़ के वनों की अधिकता व वन आरक्षी व वन वॉचर जैसे लोगों पर 50-50 किलोमीटर के एरिया को देखने के जिम्मे को मानते हैं। संरक्षणात्मक वानिकी को आखिरी रास्ता मानने वाले श्री पांडे मानते हैं कि कुछ दीर्धकालिक व कुछ तात्कालिक जिम्मेदारियां लेनी होंगी जिसके लिए दृढं इच्छाशक्ति जरूरी है। तो विस्तार से सुनते हैं दोस्तों विनोद कुमार पांडे जी की ये जंगल व आग पर एक आधारभूत बातचीत रेडियो जर्नलिस्ट सुनीता भास्कर के साथ में आपके अपने रेडियो हैलो हल्द्वानी में।

Audio file

Forest Fire Episode-4.mp3

External Expert
Participants
Sunita Bhaskar (RJ)
Language
Hindi
Format
Talk