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कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने पौखाल (टिहरी गढ़वाल) अध्ययन केंद्र का किया निरीक्षण, एनएसएस स्वयंसेवकों को किया प्रेरित

uttarkashi
कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने पौखाल (टिहरी गढ़वाल) अध्ययन केंद्र का किया निरीक्षण, एनएसएस स्वयंसेवकों को किया प्रेरित गोद लिए गए गाँव मोलनो को आदर्श गाँव बनाने की दिशा में विश्वविद्यालय की एक सराहनीय पहल पौखाल/टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय प्रो. नवीन चंद्र लोहनी जी ने राजकीय महाविद्यालय पौखाल स्थित अध्ययन केंद्र का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय में अध्ययनरत एनएसएस स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्हें नवीन विचारों को अपनाने तथा सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए प्रेरित किया। कुलपति जी ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे विश्वविद्यालय के ड्युअल डिग्री कार्यक्रम से जुड़कर अपने कौशल को विकसित करें, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें। इस अवसर पर सहायक क्षेत्रीय निदेशक उत्तरकाशी श्री अनिल कंडारी, अध्ययन केंद्र समन्वयक डॉ. बी.आर. भद्री, जिला पंचायत सदस्य श्री गंभीर सिंह भंडारी, ग्राम प्रधान श्री रंजीत लाल, श्री धनई जी सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं एनएसएस स्वयंसेवी उपस्थित रहे। निरीक्षण के पश्चात कुलपति ने उत्तरकाशी क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए ग्राम मोलनो (ब्लॉक भिलंगना) का भ्रमण किया। यहाँ आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विश्वविद्यालय की प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा कि गोद लिए गए गाँव को जिले का आदर्श गाँव बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य गाँव का समग्र (इंटीग्रेटेड) विकास करना है, जिसमें आर्थिक, आधारभूत संरचना तथा मानव विकास के विभिन्न आयाम—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल और संसाधनों तक पहुँच—शामिल हैं। गाँव विकास के प्रमुख उद्देश्य कुलपति जी ने ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष योजना के प्रमुख बिंदु साझा किए— लोगों की आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं की पहचान सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों का चयन विभिन्न सरकारी योजनाओं के संसाधनों का प्रभावी उपयोग उन्होंने स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता, मिट्टी एवं जल प्रदूषण से बचाव, तथा बालिका शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया। समग्र विकास पर विशेष फोकस इस कार्यक्रम के अंतर्गत क्षमता निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला सशक्तिकरण, स्थायी कृषि, स्वच्छ जल एवं मूलभूत सुविधाओं के विकास को शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के सहयोग से ग्राम व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। कुलपति जी ने ग्रामीणों के सुझावों को भी ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में सहायक क्षेत्रीय निदेशक श्री अनिल कंडारी ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया और आशा जताई कि विश्वविद्यालय की इस पहल के सकारात्मक परिणाम शीघ्र ही धरातल पर दिखाई देंगे।