सघन बागवानी के पूरे विज्ञान को आसान किसानी भाषा में समझा रहे हैं नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर के मनाघेर गांव के युवा बागवान व साइंटिस्ट नारायण सिंह। आपका हिमाचल में बागवानों पर आजीविका पर काम करने का लंबा अनुभव है। अपने गांव मनाघेर में पिछले तीन सालों से आपने सेब के बगींचे विकसित किये हैं , पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के द्वारा राज्य भर के 50 बागवानों को शुक्रवार को नैनीताल के चाफी में सम्मानित किया गया। जिसमें लगातार तीसरी बार आपके कार्य को भी सराहना मिली। ये सघन बागवानी परंपरागत बागवानी से कैसे अलग है कहां से इसकी अवधारणा आई, कैसे इसके तहत सेब की खेती की जा सकती है कैसे इसकी खेती करने के लिए युवा बागवानों, महिला बागवानों को थोड़ा स्मार्ट व साइंटिफिक होना पड़ेगा बहुत विस्तार से सुनते हैं उन्हीं की जुबानी आपके अपने रेडियो हैलो हल्द्वानी के ये श्रृंखला फलते पहाड़ (सेब, अखरोट व किवी से उत्तराखंड को गढ़ते युवा बागवान) में रेडियो जर्नलिस्ट (आरजे)सुनीता भास्कर के साथ
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फलता पहाड़-1.mp3
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Language
Hindi
Format
Talk

