गर्मी का मौसम शुरु होते ही पहाड़ से जो खबरें आ रही हैं वह बहुत चिंतित करने वाली हैं, कई हैक्टेअर जंगल आग के हवाले हो चुके हैं। आग उगलती भीषण गर्मी उस पर खाक होते जंगल, खत्म होती, जैव विविधता, जलते जीव जंतु। चारों ओर धुंआ ही धुंआ। और लोग मायूस लाचार होकर ये नजारा देखने को मजबूर हैं। वन विभाग अपने तमाम उपकरणों के साथ एक फॉरेस्ट गार्ड के भरोसे शायद बैठा हुआ है। एक दौर होता था जंगलों पे गांव वालों का अधिकार होता था तब गांव वाले खुद आग पर काबू करते थे जंगलों को खुद की जिम्मेदारी से सहेज कर रखते थे पर जब से वन विभाग ने जंगलों में आम आदमी के लिए पाबंदियां लगाना शुरू किया वहीं से उसके साइड इफेक्ट नजर आने लगे। वन विभाग और ग्रामीण जन समुदाय आमने सामने खड़े दिखते हैं। जब तक स्थानीय समुदाय को भरोसे में लेकर उसे ट्रेंड नहीं किया जाएगा तब तक यूं पहाड़ जलते ही रहेंगे। आईये अपने जंगलों को बचाएं नाम से आपका अपना रेडियो एक श्रृंखला लेकर आया है जिसमें वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर गांव में लंबे समय से काम कर रहे विशेषज्ञों से बातचीत की जाएगी। आज पहले एपिसोड में बात रख रहे हैं अनिरुद्ध जड़ेजा जी जो कि रामगढ़ में जीवन मांगल्य ट्रस्ट के बहाने बहुत बेहतरीन काम कर रहे हैं। कई सारे पिरुल प्लांट्स उन्होंन पहाड़ में स्थापित किये हैं अवनि संस्था के साथ मिलकर। सर्वोदय आंदोलन से जुड़े हुए सामाजिक कार्यकर्ता है। विस्तार से सुनते हैं उनकी बात
Forest Fire Episode 1.mp3

