हमारे बारे में
ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के इस युग में उच्च शिक्षा विकास का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। इस युग में विकास के सक्रिय सहभागी बने रहने के लिए हमें सकल नामांकन अनुपात (GER) को कम से कम दोगुना करने की आवश्यकता है। इस सत्य को अनेक नीति-निर्माताओं, आयोगों तथा दूरदर्शी व्यक्तियों ने भली-भांति स्वीकार किया है। राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कई मूल्यवान दस्तावेज़ प्रकाशित किए हैं। इस संदर्भ में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षण प्रणाली (ODL) की भूमिका महत्वपूर्ण और विशिष्ट हो जाती है। विश्वभर के अनुभव इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि दूरस्थ शिक्षण प्रणाली समाज के उन विभिन्न वर्गों को शैक्षिक रूप से सशक्त करने का प्रभावी साधन है, जो किसी न किसी कारण औपचारिक शिक्षा (विद्यालय/कॉलेज/विश्वविद्यालय) से वंचित रह गए थे।
आजकल दूरस्थ शिक्षा अनेक व्यावसायिक तथा तकनीकी पाठ्यक्रम उपलब्ध कराती है, जिनमें तकनीक के उन्नत उपयोग पर आधारित विशेष कार्यक्रम भी शामिल हैं। इसमें दूरस्थ क्षेत्रों और कठिन भू-भागों में रहने वाले उपेक्षित, हाशिए पर और उससे भी बाहर रह गए लोगों तक पहुँचने की क्षमता भी है। दूरस्थ शिक्षण प्रणाली के इसी दर्शन के अनुरूप उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) की स्थापना उत्तराखण्ड विधान सभा द्वारा पारित अधिनियम संख्या 23 / 2005 के अंतर्गत 31.10.2005 को की गई, जिसका उद्देश्य लचीली और नवीन शिक्षण विधियों का उपयोग करते हुए दूरस्थ शिक्षण के माध्यम से ज्ञान और कौशल का प्रसार करना तथा ‘स्वतंत्र अधिगम’ सुनिश्चित करना है।
विश्वविद्यालय नवीन शैक्षिक कार्यक्रमों, संप्रेषण तकनीकों के विविध माध्यमों और संपर्क सत्रों का उपयोग करके दूरस्थ शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाता है। विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य लक्षित समूहों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए राज्य के त्वरित उत्थान और विकास के लिए कुशल एवं ज्ञान-आधारित मानव संसाधन का निर्माण करना है। इस उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे तीव्र परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए स्वयं को पुनर्गठित किया है तथा अनेक नए एवं नवोन्मेषी स्वरोजगार/रोजगार-उन्मुख अध्ययन कार्यक्रम विकसित किए हैं।
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय विशेष रूप से महिला, जनजातीय तथा अन्य हाशिए पर स्थित वर्गों की शैक्षिक आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसने राज्य के दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों तक अपनी पहुँच सुनिश्चित की है और सबसे दुर्गम इलाकों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय ने संसाधनों और ज्ञान को जन-कल्याण हेतु साझा करने के उद्देश्य से विभिन्न संस्थानों के साथ अनेक समझौता ज्ञापनों (M.O.U) पर हस्ताक्षर किए हैं। विश्वविद्यालय की दृष्टि यह है कि उत्तराखण्ड राज्य को गुणवत्ता-युक्त उच्च शिक्षा के माध्यम से विकास के सबसे महत्वपूर्ण घटक प्रदान किए जाएँ।
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय अपने कार्यक्रमों का संचालन राज्य के विभिन्न स्थानों पर स्थापित 130 से अधिक अध्ययन केंद्रों के माध्यम से करता है, जो देहरादून, रुड़की, पौड़ी, उत्तरकाशी, रानीखेत, कर्णप्रयाग हल्द्वानी और पिथौरागढ़ स्थित आठ क्षेत्रीय केंद्रों के अधीन हैं। विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों के हित में कई प्रमुख शोध संस्थानों, कंपनियों और व्यावसायिक संस्थाओं के साथ भी समझौता ज्ञापन किए हैं।
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